गुंडों के कंधों पे खाखी वर्दी हाय तौबा 

वक्त के साथ साथ पुलिस और पब्लिक  के बीच दूरियां बढ़ती जा रही है,कारण वर्दी के अंदर का गुंडा,दरसल कभी पुलिस का रुतबा पुलिस के बीच ऐसा हुआ करता था कि पुलिस के गाड़ी का सायरन क्या बजा मानो गुंडे मवाली तो मवाली आम आदमी भी अपने घरों में दुबक जाता था कि पुलिस आई हुई है,दिन बदले समय बदल और अब लोगों को वर्दी से खौफ नही है खौफ उसके अंदर के गुंडे से है कब कहाँ किस बेकसूर को अपना शिकार बना लें ये वर्दी धारी गुंडे कोई नही जानता,
दरसल वाक्या दिल्ली से जुड़ा हुआ है जो पुलिस की उस गुंडई की तस्वीरें पेश की है जो किसी क्रिमनल से कम नही,वसूली अभियान में लगे एक पुलिस वाले गुंडे से एक बुजुर्ग ऑटो वाले से वसूली को ले कर कुछ बात चीत हुई और फिर क्या था खाखी वर्दी के अंदर घुसे गुंडे को अपनी औकात याद आ गई और उसने अपने साथ और आठ दस लठैत बुलवा लिए सभी लठैत वर्दी में ही थे फिर क्या था अदना से बुजुर्ग ऑटो ड्राइवर इनकी गुंडई के चक्कर मे दिल्ली की गलियों में लात घूंसे,डंडे,थप्पड़ खाता रहा और बेचारे बुजुर्ग को इन नरभक्षीयों ने सड़क पर घसीटते हुए पीटते रहे,और इतने में बुजुर्ग ऑटो ड्राइवर का बेटा आ गया काफी मिन्नतें इन नरपिशाचों के सामने करता रहा पर धन्य है जन सेवा के ये खाखी वर्दी धारी गुंडे बेटे की भी पिटाई शुरू हो गई

कार्यवाही के रूप में दर्जन भर नरपिशाचों में तीन को सस्पेंशन मैं पूंछता हूँ इस भृष्ट सिस्टम से की अगर इन पुलिस वालों की जगह कोई और इस कृत्य को अंजाम देता तो उसकी सजा क्या होती, और अगर किसी वर्दी वाले के साथ इस तरह सड़क में कोई करता तो उसकी सजा क्या होती अगर उसकी सजा कुछ और है तो वह सजा इन नरपिशाचों को क्यों नही और अगर सस्पेंशन ही सजा है तो कोई खड़ा करे इन नरपिशाचों को सड़क पर और जनता इनका हिसाब करे और जनता को महज मुहचलके में ऑन द स्पॉट जमानत दे दी जाये

आज देश के पास आम जनता के पास अगर किसी पे भरोषा होता है तो पुलिस पे पर अगर यही पुलिस देश भक्ति जनसेवा की जगह इस तरह से खुले आम पिटाई पे उतारू हो जाये और किसी व्यक्ति के उम्र का ध्यान न रखते हुए बेरहमी पे आ जाये तो ऐसी पुलिस से तो वो गुंडे मवाली अच्छे है जिनके ऊपर ये तमगा तो लगा होता है कि ये अपराधी किस्म के लोग है 
भगवान सद्बुद्धि दे