कई दसको से बेरोजगारी का दंश झेल रहा है बिजुरी क्षेत्र 
प्रतिभाएं कर रही है पलायन या युवा बन रहे है अपराधी
 
अनूपपुर:-कोयलांचल क्षेत्र बिजुरी मे चरम सीमा पर बेरोजगारी पलायन करने को मजबूर हो रहे यूवक या बेरोजगारी का दंश झेल रहे युवा आपराधिक गतिविधियों में जुड़ते जा रहे है जिससे चोरी डकैती कबाड़ जुआ सट्टा जैसे अपराधों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है वैसे तो कहने को हम मंगल तक पहुच गए है और विकास के मामले में विश्व कई मामले में  पहले और दूसरे पायदान में है तो  क्या देश को विकसित करने का ये मतलब नही होता की सबको रोजगार मिले? सत्ता  और सियासत के रोजगार देने के दावो से खुरदुरी है हकीकत की जमीन   दावो का सच  अपनी जगह लेकिन जमीनी सच्चाई तो यही है कि एक अदद रोजगार के लिए कोयलांचल क्षेत्र बिजुरी मे बेरोजगार दर दर की ठोकर खाने को मजबूर है   

बिजुरी:-बेरोजगारी देश व्यापी समस्या बन चुकी है जिसकी आँच कोयलांचल क्षेत्र बिजुरी मे साफ दिखाई पड़ती है दिनों-दिन बढती बेरोजगारी से हालात चिन्ता जनक होते जा रहे है  और बेरोजगारी के अक्स तले एक अदद रोजगार के लिए यूवक दर दर की ठोकर खाने को मजबूर है  बेरोजगारी मौजूदा वक्त पर कोयलांचल क्षेत्र बिजुरी की सबसे बड़ी समस्या है चाहे केन्द्र सरकार हो या सूबे की सरकार बेरोजगारी दूर करने के मद्देनजर योजनाए तो कई चलाकर  अपनी पीठ थपथपाती है मगर बेरोजगारो को रोजगार मिलता नही कहते है कि जहा सरकारी  उद्योग है वहा बेरोजगारी नही मगर बिजुरी कोयलांचल क्षेत्र मे चार कोयला खदाने संचालित है मगर शहर हो या गांव घर-घर यूवा बेरोजगार है  बेरोजगारी से जूझ रहे यूवा या तो   अपराधिक गतिविधियो के  आसरे जीविकोपार्जन करने को मजबूर हो रहे है  या यूवा अब  रोजगार के लिए पलायन करने को मजबूर हो रहे है 
सरकारे नही है गंभीर:-
देश मे सभी यूवको रोजगार देने की दिशा मे सरकारे गंभीरता से क्यो नही सोचती ? एक  ऐसी ठोस नीति क्यो नही बनाई जाती जिसके आसरे बेरोजगार यूवको को रोजगार दिया जा सके ?!  जाहिर है देश की  उन्नति यूवको नौजवानो पर है  

दर्जनों कोयला खदान फिर भी युवा बेरोजगार:-
गौरतलब है  बिजुरी नगर की पहचान  एक कोयलांचल क्षेत्र के रूप मे होती है बिजुरी नगर के आसपास मौजूदा समय मे दर्जनों कोयला खदाने संचालित है उक्त कोयला खानो से हजारो टन कोयला का उत्पादन होता है ऐसे मे क्षेत्र के बिभिन्न कोयला खदानो के उत्पादन के आसरे बिजुरी नगर देश के उन्नति और विकास मे अहम योगदान देता है मगर बड़ा  सवाल है कि दर्जनों कोयला खदानो के होने के बाद भी बेरोजगारी क्यो?
नियमित भर्ती पर प्रतिबंध क्यों:-
 स्मरणीय है कि कोयला उद्योग मे सरकार नियमित भर्ती पर प्रतिबंध लगा दिया है जानकारो के अनुसार बीते लगभग  35  वर्षो से कोयला उद्योग मे उद्योग कार्यालयो के द्वारा की जाने श्रमिको की भर्ती पूर्णरूप से बंद है जिस वजह से  कोयला उद्योग मे बेरोजगार यूवको को नियमित नौकरी मिलती नही हलाकी हर महीने बड़ी संख्या मे नियमित श्रमिक सेवानिवृत्ति होते है उनकी जगह भी खाली भी  होती है मगर नियमित भर्ती पर लगी पाबंदी के कारण भर्ती नही की जाती है खाली श्रमिको की पूर्ती ठेकेदारी श्रमिको से की जाती है, और ठेकेदारी श्रमिको को भी समय पर वेतन नही मिलता  और जो मिलता भी है उक्त वेतन के  आसरे जीविकोपार्जन  आसान नही
ठेकेदारी करना आसान नही:-
 इसी के समानांतर कोयला उद्योग मे ठेकेदारी करना भी  आसान नही जाहिर है ठेकेदारी करने के लिए पूंजी की सबसे पहले  आवश्यकता होती है जो एक  आम बेरोजगार के पास होती नही  ऐसा भी नही है की काम  कर के तत्काल  उक्त काम के बदले भुगतान मिल जाए भुगतान के लिए कम से कम तीन से चार महीने का इन्तजार करना होता है जो एक बेरोजगार के संभव होता नही,  इसी तरह से ठेकेदारी मे कागजी खानापूर्ति इतनी होती है कि एक  आम ठेकेदार काम करने के बाद भी भुगतान के लिए  आफिस के चक्कर लगा कर परेशान हो जाता है 
सरकारी नियम है बाधा:-
क्षेत्र की विभिन्न कोयला खदानो मे ठेकेदारी के  आसरे जीविकोपार्जन करने वाले लोगो के अनुसार पूर्व मे उप क्षेत्रो मे दो दो लाख के निर्माण कार्यो के कई निर्माण कार्य कराए जाते थे जिसे  शासकीय स्वक्रित के विभिन्न ठेकेदारो को प्रक्रिया पूरी करने के लिए दिए जाते थे नियमानुसार प्रक्रिया पूरी कर  उक्त निर्माण  कामो के आसरे कई छोटे छोटे ठेकेदार  ठेकेदारी कर  कालरियो मे ठेकेदारी का काम कर  अपना और  अपने परिवार का जीविकोपार्जन करते थे,मगर बीते दो वर्ष से नीयमो मे बदलाव कर दिया गया  जानकारो के अनुसार  अब नये नीयमो के मुताबिक  उक्त छोटे-छोटे कामो को मिलाकर बड़ी निविदाए निकाली जाती है जिनकी अनुमति लागत करोड़ो तक पहुंच जाती है जिससे छोटे मझोले ठेकेदार निविदा भर ही नही पाते या बड़े कामो के नीयमो के मापदंडो खरे नही  उतर पाते ,जिससे छोटे ठेकेदार उक्त कामो को लेने वंचित हो जाते है इसी के समानांतर  छोटे ठेकेदारो के पैसे की कमी होती है कुलमिलाकर नीयमो मे बदलाव होने से छोटे ठेकेदारो के सामने अब रोजी रोटी का संकट  उठ खड़ा हुआ है जिससे कोयलांचल क्षेत्र बिजुरी मे बेरोजगारी चरम सीमा पर पहुंच गई है ! 
निजी व्यवसाय करना आसान नही:-
अब एक सवाल  आपके जहन में  उठ रहा होगा  उठना भी चाहिए क्या निजी व्यवसाय करके बेरोजगारी दूर नही की जा सकती?  जनाब जबाब सीधा है छोटी पूजी या फिर बड़ी पूजी लगाकर मौजूदा वक्त मे  निजी व्यवसाय को पटरी पर लाना आसान नही क्योंकि बाजार मे धंधो के मद्देनजर प्रतिस्पर्धा  इतनी ज्यादा बढ गयी है या फिर   बढा दी  गयी है कि अगर व्यवसाय सफल हुआ तब तो ठीक  और  अगर निजी धंधा कही असफल हुआ तो फिर मतलब साफ है पूजी डूबना लगभग तय है , पूजी डूबने का खतरा  और निजी धंधे मे कंपटीशन से वर्तमान समय निजी धंधा आसान नही रहा !इस मुद्दे पर भी सबके अपने  अपने तर्क हो सकते है मगर जब बेरोजगारी के अक्स तले करीब से परखिएगा तो दिखाई तो यही देता है कि बेरोजगारी मौजूदा वक्त की सबसे बड़ी समस्या है  , अब ये अलग बात है कि दो जून की रोटी के लिए बेरोजगार बेरोजगारी के तलहटी तले किसी प्रकार जीवन यापन कर रहे है और बामुश्किल अपना और अपने परिवार का गुजारा कर रहे है
 क्या हो सकता है  --: हलाकी कोल इंडिया द्वारा सीधी भर्ती बंद कर दी गई है स्वयं के व्यवसाय मे पूजी और कठिन कानूनी प्रक्रिया का अड़ंगा फिर भी सारे रास्ते बंद नही है जिला प्रशासन  अगर चाहे तो जिला खनिज मद से कोयलांचल के बेरोजगार यूवको के लिए रोजगार परखी योजनाए बना कर  इन बेरोजगार यूवको के लिए सहारा दिया जा सकता है !इस कार्य हेतु  इस मद पर पर्याप्त धन राशि उपलब्ध है  और  इसे खर्च करने मे किसी प्रकार का नीतिगत अड़ंगा नही है फिर भी यह समझ से परे है कि  इस राशि पर नतो जिला प्रशासन गंभीर दिखता  और नही माननीय जनप्रतिनिधि