डिंडोरी के घुघुवा में प्राकृतिक का अमूल्य खजाना।
भारत का एक मात्र स्थान जहाँ पर भारी मात्रा में है जीवाश्म


डिंडोरी के तहसील मुख्यालय शहपुरा अंतर्गत घुघवा फॉसिल नेशनल पार्क में जीवाश्म देखने मिलते हैं। पेड़, पौधे, पत्ते, सीप सहित डायनासौर के अण्डे के जीवाश्म भी यहां मौजूद हैं। सबसे अलग होने की वजह से टूरिस्ट और रिसर्च में रुचि रखने वाले लोग यहां बड़ी संख्या में आते हैं।यहाँ पर
करोड़ो साल पुराने जीवाश्म पाए जाते हैं
इस पार्क को प्लांट फॉसिल पार्क भी कहते हैं। बताया जाता है कि यहां करोड़ों साल पहले अरब सागर हुआ करता था। प्राकृतिक परिवर्तन की वजह से पेड़ से पत्ते तक जीवाश्म में परिवर्तित हो गए।
घुघवा फॉसिल नेशनल पार्क में डायनासौर के अंडे के जीवाश्म देखने मिलते हैं।सही समय पर बाहर ना आने और प्राकृतिक परिवर्तन के चलते ये पत्थर में परिवर्तित हो गए हैं
यहां लकड़ी के जीवाश्म भी देखने मिलते हैं। ऐसे कई वृक्षों के जीवाश्म हैं जो सदियों पहले हुआ करते थे, लेकिन अब उनका कोई वजूद नहीं है। दूर से देखने पर ये भी पत्थर की तरह ही प्रतीत होते हैं। यहां कई पूरे साबूत पेड़ हैं जो खड़े जीवाश्म में परिवर्तित हो गए इसके अलावा पत्थरों पर चिपके
हुए पत्तों के जीवाश्म भी यहां देखने मिलते हैं। अचानक आए परिवर्तन ने पेड़ों के पत्तों को भी चिपका दिया था। ये उस वक्त जिस अवस्था में थे उसी अवस्था में पत्थर में परिवर्तित हो गए, जिनके निशान इस पार्क में देखने मिलते हैं,
इस पार्क में सीप के भी जीवाश्म देखने मिलते हैं। समुद्र में पायी जाने वाली सीप जो पत्थर में तब्दील हो गई। वैज्ञानिकों ने कुछ को तो पत्थरों के अंदर से खुदाई करके निकाला, जबकि कुछ तो वैसे ही मिली जैसी जीवित अवस्था में देखने मिलती हैं।
वैज्ञानिकों ने बरसों की रिसर्च के बाद यहां मिली वही प्रत्येक वस्तु के संबंध में जानकारी प्राप्त की और उन्हें पार्क में संरक्षित किया। जीवाश्म राष्ट्रीय उद्यान में एक ताड़ के पेड़ का भी जीवाश्म है जो पत्थर बना हुआ पेड़ का नीचला हिस्सा यहां मौजूद है, जिसके कारण यह पार्क पर्यटको को खूब भाता है।