परिवार के मदद के बजाय, भरी बरसात में सामुदायिक भवन से निकालने का फरमान जारी

डिंडोरी के मेहंदवानी ब्लॉक का मामला

डिंडौरी -जिले के मेंहदवानी जनपद मुख्यालय में अफसरों की लापरवाही और मनमानी के कारण एक गरीब परिवार जर्जर सामुदायिक भवन में गुजर बसर करने के लिये मजबूर है। हैरत की बात तो यह है कि ग्रामपंचायत के सरपंच पीड़ित परिवार की मदद करने की बजाय सामुदायिक भवन खाली करने नोटिस जारी किया है वहीं जब हमने इस मामले में जनपद पंचायत के सीईओ जे पी मिश्रा से बात करना चाहा तो साहब कैमरा देखते ही भड़क गये और मीडियाकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज़ कराने की धौंस दिखाने लगे। दरअसल मेंहदवानी में आवास के लिये एक परिवार पिछले पांच वर्षों से ग्रामपंचायत एवं सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है,पीड़ित परिवार कलेक्टर से लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री तक से अपनी गुहार लगा चुका है लेकिन अबतक किसी भी ने उनकी सुध नहीं ली है। आपको बता दें कि आर्थिक तंगी से जूझ रहे इस बेघर परिवार का मुखिया दिव्यांग है जो अपनी पत्नी के साथ मजदूरी कर जैसे तैसे अपने परिवार का पालन पोषण करता है। दूसरों घर बर्तन मांजकर मजदूरी करने वाली पीड़ित परिवार की सदस्य अनीता ने बताया कि बेघर होने के बाद पेड़ के नीचे दो दिन गुजारा और करीब 15 दिन जानवरों के साथ कांजी हॉउस में भी रहना पड़ा है फिर स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें सामुदायिक भवन में रहने की इजाजत दी गई थी,पीड़ित परिवार करीब डेढ़ साल से जर्जर हो चुके सामुदायिक भवन में रह रहे हैं जिन्हें जवाबदार आवास योजना का लाभ दिलाने के बजाय भवन खाली करने का दबाव बना रहा है। जनपद मुख्यालय जहां सभी बड़े अधिकारी रहते हैं वहां पात्र होते हुये भी एक परिवार आवास योजना के लिये दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर है ऐसे में ग्रामीण इलाकों में सरकारी योजनाओं के क्या हाल होंगे जिसका अंदाजा बड़ी आसानी से लगाया जा सकता है।